रवीश कुमार के “एंटी-बीजेपी” रुख और कांग्रेस/वाम समर्थन से जुड़े मुख्य बिंदु:


🟥 1. लगातार भाजपा सरकार की आलोचना, लेकिन विपक्ष पर नरमी

  • रवीश कुमार ने मोदी सरकार की लगभग हर बड़ी योजना जैसे नोटबंदी, GST, कृषि कानून, कोरोना काल की नीतियों, बुलडोज़र राजनीति, और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर कड़ी आलोचना की है।
  • NDTV पर उनके शो “प्राइम टाइम” में अक्सर BJP नेताओं को न्योता नहीं दिया जाता था, या उन्हें आलोचना के केंद्र में रखा जाता था, लेकिन विपक्ष के लिए स्पेस अधिक मिलता था।

🟥 2. “गोदी मीडिया” टैग का इस्तेमाल मुख्यतः भाजपा समर्थक मीडिया के लिए

  • रवीश ने “गोदी मीडिया” शब्द को मीडिया के उस वर्ग के लिए गढ़ा जो भाजपा सरकार की आलोचना नहीं करता।
  • हालांकि, उन्होंने कभी NDTV या विपक्षी दलों के समर्थक मीडिया पर उतनी तीखी टिप्पणी नहीं की।

🟥 3. सोशल मीडिया पर कांग्रेस और वामपंथी नेताओं के लिए नरम रुख

  • उनके पुराने ट्वीट्स और भाषणों में अक्सर भाजपा की आलोचना, और राहुल गांधी जैसे नेताओं की रणनीति का परोक्ष समर्थन देखा जा सकता है।
  • जेएनयू विवाद के समय रवीश कुमार ने वामपंथी छात्रों के पक्ष में खड़े होकर सरकार की कार्रवाई की आलोचना की थी।

🟥 4. NDTV के झुकाव पर सवाल

  • NDTV पर रवीश कुमार के नेतृत्व में रिपोर्टिंग के दौरान BJP समर्थकों ने यह आरोप लगाया कि चैनल की संपादकीय नीति कांग्रेस और वामपंथ के अनुकूल थी।
  • NDTV को कभी-कभी “वामपंथी रुझान” वाले चैनल के रूप में देखा गया, और रवीश को इसका प्रमुख चेहरा।

🟥 5. केवल भाजपा के मंत्रियों और नेताओं को “प्रवक्ता शैली” में दिखाना

  • भाजपा के प्रवक्ताओं को उनके शो में या तो बुलाया नहीं जाता, या यदि बुलाया जाए तो तीखे सवालों और कटाक्षों के बीच उन्हें बोलने का मौका कम मिलता है।
  • इसके विपरीत, विपक्षी नेताओं को या उनके समर्थक विचारों को अधिक स्पेस और सम्मानजनक तरीके से पेश किया जाता है।

🟥 6. राहुल गांधी की “भारत जोड़ो यात्रा” पर परोक्ष समर्थन

  • जहाँ कई पत्रकारों ने इस यात्रा को केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम माना, रवीश कुमार ने इसे एक लोकतांत्रिक और सकारात्मक पहल के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे यह संकेत गया कि वे राहुल गांधी की छवि को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं।

🟥 7. मुर्शिदाबाद हिंसा पर मीडिया में छप रही खबरों पर संदेह करना और ममता बैनर्जी का समर्थन

​रवीश कुमार ने मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बंगाल से आ रही हिंसा की खबरें अतिरंजित हैं और इनकी विश्वसनीयता पर संदेह है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोगों को इन रिपोर्टों पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए और कुछ दिन प्रतीक्षा करनी चाहिए। रवीश कुमार ने यह भी कहा कि अधिकांश रिपोर्टें ‘गोदी मीडिया’ द्वारा फैलाई जा रही हैं, जिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। ​

पूरा देश और दुनिया देख रही है की मुर्शिदाबाद में कितने गंभीर हालात हैं, लेकिन ममता बैनर्जी को दोष देने के स्थान पर रवीश कुमार ने एक बार फिर पूरे मीडिया को गोदी मीडिया कहते हुए एक बार फिर से अपना एंटी भाजपा रूप दिखाया है और तृणमूल काँग्रेस और लेफ्ट की वकालत शुरू कर दी है।


निष्कर्ष

इन तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि रवीश कुमार की पत्रकारिता में भाजपा के प्रति तीव्र आलोचनात्मक रुख और कांग्रेस या वामपंथी रुझानों के प्रति सहानुभूति देखने को मिलती है। इसी कारण उन्हें “एंटी-बीजेपी” और “वामपंथ या कांग्रेस समर्थक” पत्रकार कहा जाता है।

April 15, 2025 | New Delhi | Curated By the team at Boldvoices.in

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