🔍 आरोप और यूपीएससी की कार्रवाई

जुलाई 2024 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने पूजा खेडकर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। उन पर आरोप है कि उन्होंने:

  • फर्जी पहचान का उपयोग किया, जिसमें नाम, माता-पिता के नाम, फ़ोटोग्राफ और संपर्क विवरण को बदलकर सिविल सेवा परीक्षा में अनुमत प्रयासों से अधिक बार परीक्षा दी।
  • आरक्षण का गलत इस्तेमाल किया, विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और दिव्यांग (PwBD) कोटे का, जिससे उन्हें चयन प्रक्रिया में अनुचित लाभ मिला।

यूपीएससी ने उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा शुरू किया और एक कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें उनकी उम्मीदवारी रद्द करने और भविष्य की परीक्षाओं से उन्हें प्रतिबंधित करने की बात कही गई।


🏛️ न्यायिक घटनाक्रम

दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी पूर्व गिरफ्तारी जमानत याचिका खारिज कर दी, और इसे “धोखाधड़ी का क्लासिक उदाहरण” बताया। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहाँ उन्हें अंतरिम गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की गई, बशर्ते कि वह जांच में सहयोग करें।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता क्यों है, क्योंकि खेडकर स्वयं शायद फर्जी दस्तावेज़ों की रचयिता नहीं हैं। हालांकि, यूपीएससी ने तर्क दिया कि यह मामला अभूतपूर्व धोखाधड़ी का है और इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है।


📰 हाल की घटनाएँ

  • सुप्रीम कोर्ट ने खेडकर को दी गई अंतरिम गिरफ्तारी से राहत को 15 अप्रैल 2025 तक के लिए बढ़ा दिया है।
  • यूपीएससी अभी भी हिरासत में पूछताछ की मांग कर रहा है ताकि यह पता चल सके कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
  • पूजा खेडकर ने सभी आरोपों से इनकार किया है और दावा किया है कि उनकी पहचान बायोमेट्रिक डेटा से सत्यापित हुई थी, और उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं की।

April 15, 2025 | New Delhi | Curated By the team at Boldvoices.in

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