April 15, 2025 | New Delhi | By Gurdeep Singh, Senior Editor at Boldvoices.in


भारतीय संविधान का अनुच्छेद 356 केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह किसी राज्य में “राष्ट्रपति शासन” लागू कर सके, जब वहां की सरकार संविधान के अनुसार नहीं चल रही हो। हाल के वर्षों में पश्चिम बंगाल की राजनीतिक, सामाजिक और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वहां राष्ट्रपति शासन लागू करने की आवश्यकता है। इस लेख में हम उन प्रमुख कारणों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे जिनके आधार पर यह कदम उचित ठहराया जा सकता है।


1. कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति

पश्चिम बंगाल में हाल के वर्षों में हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं, विशेष रूप से चुनावों के दौरान और बाद में:

  • पंचायत और विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर हिंसा, हत्याएं और आगजनी की घटनाएं दर्ज हुई हैं।
  • राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्याएं और हमले आम हो गए हैं।
  • पुलिस की निष्क्रियता और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से जनता का कानून व्यवस्था में विश्वास डगमगाया है।

2. लोकतंत्र की अवहेलना

  • विरोधी दलों को खुलकर काम नहीं करने दिया जाता, उनकी रैलियों और सभाओं में बाधाएं डाली जाती हैं।
  • मीडिया पर दबाव डालने के प्रयास, और सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने के प्रयास भी सामने आए हैं।
  • स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया बार-बार सवालों के घेरे में रही है।

3. राजनीतिक हिंसा और दमन

  • राज्य में राजनीतिक हिंसा केवल चुनावों तक सीमित नहीं रही, यह एक स्थायी खतरा बन चुकी है।
  • विरोधी पार्टियों के समर्थकों पर हमले, उनके घर जलाना, नौकरी और शिक्षा में भेदभाव की शिकायतें सामान्य हो गई हैं।
  • मानवाधिकार संगठनों और कोर्ट्स तक ने समय-समय पर इन घटनाओं पर चिंता जताई है।

4. प्रशासनिक तंत्र का राजनीतिकरण

  • राज्य पुलिस और प्रशासन को राजनीतिक हितों के अनुसार प्रयोग किए जाने के गंभीर आरोप हैं।
  • कानून व्यवस्था की स्थिति पर नियंत्रण के बजाय राजनीतिक प्रतिशोध और दबाव के लिए सरकारी तंत्र का उपयोग हो रहा है।
  • ऐसे वातावरण में निष्पक्ष शासन व्यवस्था की उम्मीद करना असंभव प्रतीत होता है।

5. राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा

  • सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ, नकली नोटों का कारोबार और आतंकवादी गतिविधियों के प्रति राज्य सरकार की सुस्ती चिंता का विषय है।
  • बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों में कानून व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय की कमी गंभीर खतरे को जन्म देती है।

संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत यदि राज्य की स्थिति संविधान के अनुरूप नहीं चल रही हो, तो केंद्र सरकार वहां राष्ट्रपति शासन लागू कर सकती है। हालांकि यह एक गंभीर और असाधारण कदम है, लेकिन जब राज्य सरकार लोकतंत्र, कानून व्यवस्था और नागरिक अधिकारों की रक्षा करने में विफल हो जाए, तब इस उपाय को अपनाना अनिवार्य हो जाता है।


मुर्शिदाबाद हिंसा: एक गंभीर चेतावनी

पश्चिम बंगाल की वर्तमान स्थिति को केवल “राजनीतिक असहमति” का नाम देकर टालना उचित नहीं है। लगातार बढ़ती हिंसा ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। इस हिंसा के दौरान तीन लोगों की मौत हुई, कई घायल हुए, और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा। इस स्थिति को देखते हुए, राज्य में तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू करने की आवश्यकता पर विचार करना उचित प्रतीत होता है।​


1. प्रशासनिक विफलता और हिंसा का विस्तार

8 अप्रैल 2025 को वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें चार पुलिसकर्मी घायल हुए और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया ।​

2. नागरिकों की सुरक्षा पर संकट

हिंसा के दौरान तीन लोगों की मौत हुई, जिनमें दो सीपीआई (एम) के कार्यकर्ता शामिल थे । इसके अलावा, 21 वर्षीय इजाज मोमिन की गोली लगने से मौत हो गई, जिसके बारे में आरोप है कि यह पुलिस फायरिंग का परिणाम था ।​

3. कानून-व्यवस्था की स्थिति

हिंसा के बाद, प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं और धारा 144 लागू की । हालांकि, हिंसा की तीव्रता को देखते हुए, कलकत्ता हाई कोर्ट ने केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया ।​


राष्ट्रपति शासन की आवश्यकता

1. संवैधानिक प्रावधान

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 356 कहता है कि यदि किसी राज्य में संविधान के अनुसार शासन नहीं चल रहा हो, तो राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है। मुर्शिदाबाद की स्थिति इस प्रावधान के अंतर्गत आती है।​

2. राज्य सरकार की निष्क्रियता

राज्य सरकार हिंसा को रोकने में विफल रही है, जिससे नागरिकों का विश्वास डगमगाया है। इससे पहले भी, संदेशखाली और अन्य क्षेत्रों में हुई घटनाओं में सरकार की निष्क्रियता देखी गई है।​


निष्कर्ष

मुर्शिदाबाद की हालिया हिंसा पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाती है। राज्य सरकार की विफलता और नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए, वहां तत्काल राष्ट्रपति शासन लागू करना आवश्यक है।हिंसा, प्रशासनिक पक्षपात, लोकतांत्रिक संस्थाओं का हनन और जनता का डर — ये सभी संकेत करते हैं कि राज्य अब सामान्य शासन के योग्य नहीं रह गया है। इसलिए वहां राष्ट्रपति शासन लागू करना न केवल संवैधानिक रूप से उचित है, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।


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