April 15, 2025 | New Delhi | By Gurdeep Singh, Senior Editor at Boldvoices.in
तेलंगाना भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने अनुसूचित जातियों (SC) के भीतर उप-वर्गीकरण (sub-categorisation) को आधिकारिक रूप से लागू किया है। यह कदम सामाजिक न्याय, समावेश और आरक्षण के समान वितरण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
🔍 प्रमुख बिंदु: तेलंगाना में SC उप-वर्गीकरण
📜 विधायी पृष्ठभूमि
- तेलंगाना विधानसभा ने 18 मार्च 2025 को “तेलंगाना अनुसूचित जाति (आरक्षण का युक्तिकरण) अधिनियम 2025” पारित किया।
- यह अधिनियम 1 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट की सात-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा SC और ST श्रेणियों के भीतर उप-वर्गीकरण की वैधता को मंजूरी देने वाले ऐतिहासिक फैसले के आधार पर तैयार किया गया।
🗓️ कार्यान्वयन की तिथि
- राज्यपाल के अनुमोदन के बाद यह अधिनियम 14 अप्रैल 2025, यानी डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के दिन लागू किया गया।
📊 आरक्षण का नया ढांचा
राज्य की 59 अनुसूचित जातियों को तीन समूहों में विभाजित किया गया है:
- समूह I
- 15 सबसे पिछड़ी जातियाँ
- 1% आरक्षण
- समूह II
- 18 मध्यम लाभान्वित जातियाँ
- 9% आरक्षण
- समूह III
- 26 अपेक्षाकृत लाभान्वित जातियाँ
- 5% आरक्षण
यह वर्गीकरण न्यायमूर्ति शमीम अख्तर आयोग की सिफारिशों पर आधारित है, जिसने जातियों की सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन किया।
🎯 उद्देश्य और प्रभाव
- समानता की दिशा में पहल: जो जातियाँ अब तक आरक्षण से वंचित रहीं, उन्हें अधिक अवसर देना।
- सामाजिक न्याय का विस्तार: आरक्षण के लाभों को सभी SC समुदायों में न्यायपूर्ण ढंग से वितरित करना।
- वास्तविक समावेशिता: केवल प्रभावशाली जातियों तक सीमित लाभ को तोड़ना और सभी को समान हिस्सेदारी देना।
🗣️ सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
- राज्य सरकार ने इस निर्णय को एक ऐतिहासिक सामाजिक सुधार बताया है।
- हालांकि कुछ लाभान्वित समुदायों ने इस पर आपत्ति जताई है और पुनर्विचार की मांग की है।
- सामाजिक संगठनों और शिक्षाविदों ने इस कदम को सकारात्मक रूप में देखा है, जो संविधान की आत्मा के अनुरूप है।
📌 निष्कर्ष
तेलंगाना का यह ऐतिहासिक निर्णय न केवल राज्य में सामाजिक न्याय की दिशा में मील का पत्थर है, बल्कि यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल नीति के रूप में उभर सकता है। उप-वर्गीकरण से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि आरक्षण का लाभ केवल सीमित वर्ग तक न रह जाए, बल्कि सभी वंचित जातियाँ इससे समान रूप से लाभान्वित हों।












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