🔥 मुर्शिदाबाद हिंसा: पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की सुरक्षा पर सवाल
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ जारी प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई, जिसमें एक पिता-पुत्र की जोड़ी भी शामिल है। इस घटना के बाद राज्य में तनाव का माहौल है।
🛑 हिंसा की पृष्ठभूमि
वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान शुक्रवार को मुर्शिदाबाद में हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई। पुलिस फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत की भी पुष्टि हुई है। धुलियान इलाके में हिंदुओं की दुकानों को लूटे जाने की खबरें भी सामने आई हैं। अब तक 138 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 35 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
🗣️ शुभेंदु अधिकारी का बयान
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “बंगाल में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। स्थिति बहुत गंभीर है। यहां हिंदू त्योहार मनाने के लिए कोर्ट जाना पड़ता है।” उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री से केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की।
⚖️ कोर्ट का हस्तक्षेप
कलकत्ता हाई कोर्ट ने शनिवार को मुर्शिदाबाद जिले में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की तैनाती का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि वह पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में हो रही बर्बरता की घटनाओं पर आंखें नहीं मूंद सकता।
🛡️ प्रशासनिक कार्रवाई
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के महानिरीक्षक करणी सिंह शेखावत ने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की कि राज्य में वक्फ (संशोधन) अधिनियम लागू नहीं किया जाएगा, जिससे स्थिति को शांत करने की कोशिश की जा रही है।
🔍 निष्कर्ष
मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि आम जनता भय और असुरक्षा के माहौल में जी रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों को मिलकर शांति और सौहार्द बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए।












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