अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ती तनातनी के बीच एक नई रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के शीर्ष अधिकारियों ने अमेरिका के साथ वार्ता से पहले देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को संभावित खतरों को लेकर आगाह किया था। इसके साथ ही खामेनेई को सलाह दी गई थी कि अमेरिका से बातचीत की अनुमति दी जाए ताकि कूटनीतिक रास्ता खुला रह सके।


🕊️ ओमान में गुप्त वार्ता

हाल ही में ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच एक गुप्त वार्ता हुई। यह बातचीत पिछले कई वर्षों के बाद पहली बार हुई जिसमें अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची आमने-सामने आए।

इस बैठक को व्हाइट हाउस ने “एक सकारात्मक पहल” करार दिया है। ओमान, जो पहले भी दोनों देशों के बीच पुल का काम करता रहा है, इस बार भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।


⚠️ खामेनेई को दी गई चेतावनी

ईरानी खुफिया और रक्षा संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने खामेनेई को बताया कि यदि अमेरिका के साथ बातचीत नहीं की गई, तो इससे ईरान को वैश्विक मंच पर और आर्थिक रूप से गंभीर नुकसान हो सकता है। इस चेतावनी के बाद ही खामेनेई ने अमेरिका के साथ सीमित वार्ता की अनुमति दी।


🗣️ बातचीत की दिशा और स्वरूप

  • दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि यह बातचीत सीमित उद्देश्य के लिए है – मुख्य रूप से परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर चर्चा।
  • वार्ता अप्रत्यक्ष रूप से ओमानी विदेश मंत्रालय के माध्यम से संचालित हुई।
  • ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने कहा कि यह बातचीत “राष्ट्रीय हितों की रक्षा और टकराव टालने के लिए जरूरी कदम” है।

📅 अगली बैठक 19 अप्रैल को

अमेरिका और ईरान ने 19 अप्रैल को अगली वार्ता के लिए सहमति जताई है। यह वार्ता यह तय करने में अहम होगी कि दोनों देश भविष्य में एक औपचारिक समझौते की ओर बढ़ते हैं या नहीं।


🌍 वैश्विक प्रभाव

इस वार्ता की सफलता न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों को प्रभावित करेगी, बल्कि पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक तेल बाजारों पर भी असर डालेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालने में सफल होते हैं, तो यह पूरी दुनिया के लिए एक राहत की बात होगी।


Curated by Gurdeep Singh, Senior Editor at http://www.boldvoices.in

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