सैफ अटैक मामला: आरोपी ने झूठ बोलकर काम पाया, सुपरवाइज़र की मदद से पकड़ा गया

घटना की पृष्ठभूमि:

16 जनवरी 2025 को अभिनेता सैफ अली खान पर उनके बांद्रा (पश्चिम) स्थित घर में डकैती की नीयत से हमला किया गया। हमला असफल रहा लेकिन इसके बाद आरोपी मोहम्मद शरीफुल फकीर इस्लाम (30 वर्ष) फरार हो गया।

पहचान छुपाने की तरकीब:

  • शरीफुल ने “विजय दास” के नाम से फर्जी पहचान बनाई और एक हाउसकीपिंग एजेंसी के सुपरवाइज़र अमित पांडे से संपर्क किया।
  • उसने पांडे से कहा कि उसके पास अभी आधार कार्ड नहीं है और बाद में देगा।
  • पांडे ने उसे मुंबई के वर्ली, प्रभादेवी, चेंबूर, और बांद्रा सहित कई होटलों में काम दिलवाया।

घटना के दिन और झूठी कहानी:

  • 9 जनवरी को उसे बांद्रा के एक होटल में काम पर रखा गया, पर 13 जनवरी के बाद वह काम पर नहीं आया।
  • जब सुपरवाइज़र पांडे ने उससे संपर्क किया, तो शरीफुल ने कहा कि महिम स्टेशन पर ट्रेन में एक पुलिसकर्मी से झगड़ा हो गया था और उसे दो दिन लॉकअप में रखा गया।

सैफ पर हमले के बाद:

  • 16 जनवरी को जब हमला हुआ, उसी दिन शरीफुल ने पांडे से ₹1,000 UPI से लिए लेकिन फिर भी काम पर नहीं आया।
  • 18 जनवरी को पांडे ने टीवी पर जब हमलावर की तस्वीर देखी, तो उसने पहचान लिया कि यह वही विजय दास है।
  • अगले दिन पुलिस ने शरीफुल को पकड़ लिया।

पुलिस की जांच:

  • फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) और CCTV फुटेज की मदद से आरोपी की पहचान की गई।
  • पुलिस ने जब उसके साथी के PayTM से किए गए ₹6 के भुगतान का पता लगाया, तो उसके लिंक से अमित पांडे का नंबर मिला।
  • पांडे ने पुलिस को पूरी जानकारी दी जिससे आरोपी का ठाणे के गोडबंदर रोड स्थित मजदूर कैंप में छिपे होने का पता चला।
  • आरोपी को झाड़ियों के बीच से पकड़ लिया गया।

चार्जशीट और गवाह:

  • पुलिस ने कुल 111 गवाहों की सूची बनाई है, जिसमें 48 लोगों के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें सुपरवाइज़र पांडे भी शामिल हैं।

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