📌 घटना का सारांश
म्यांमार में फर्जी नौकरी के बहाने फंसाए गए 60 भारतीय नागरिकों को सफलतापूर्वक बचाया गया है। इन लोगों को सोशल मीडिया, विशेषकर टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के ज़रिये आकर्षक नौकरी के प्रस्ताव देकर म्यांमार बुलाया गया था। वहां पहुंचने के बाद इन नागरिकों को जबरन साइबर अपराधों में शामिल किया गया, जहां उन्हें प्रतिदिन 22 घंटे तक काम करने को मजबूर किया गया और विरोध करने पर प्रताड़ित किया गया।
🚨 फर्जी नौकरी का जाल
भारतीय नागरिकों को डेटा एंट्री, ग्राहक सेवा, या तकनीकी सहायता जैसी नौकरियों का झांसा देकर म्यांमार लाया गया। वास्तविकता में, उन्हें ऑनलाइन स्कैम्स—जैसे विदेशी नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटरों—में काम करने को मजबूर किया गया। इन केंद्रों में हथियारबंद लोगों की निगरानी में रखा गया और यदि कोई भागने की कोशिश करता तो उसे शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ता।
🛡️ बचाव और पुनर्वास
भारतीय दूतावास और थाईलैंड की स्थानीय एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से इन नागरिकों को म्यांमार-थाईलैंड सीमा के मायावडी क्षेत्र से छुड़ाया गया। यह क्षेत्र म्यांमार के सशस्त्र विद्रोही समूहों के नियंत्रण में है। जुलाई 2024 से अब तक कुल 101 भारतीय नागरिकों को म्यांमार से बचाकर भारत वापस लाया जा चुका है।
⚠️ सरकार की चेतावनी
भारतीय दूतावास ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अनधिकृत एजेंसियों के माध्यम से मिलने वाले नौकरी के प्रस्तावों के प्रति सतर्क रहें। म्यांमार, कंबोडिया और थाईलैंड जैसे देशों में किसी भी नौकरी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले संबंधित भारतीय मिशन या दूतावास से अवश्य संपर्क करें।
🧭 निष्कर्ष
यह घटना इस बात का प्रमाण है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर अपराध सिंडिकेट किस हद तक फैल चुके हैं। भारतीय युवाओं को फंसाने के लिए ये समूह फर्जी नौकरी के झांसे का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे बचने के लिए नागरिकों को जागरूक और सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है। विदेश में नौकरी के किसी भी अवसर को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें।

Curated by: Team of BoldVoices.in











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