🧨 विवाद की शुरुआत: ‘शरबत जिहाद’ टिप्पणी

हाल ही में योग गुरु बाबा रामदेव ने अपने एक प्रचार वीडियो में ‘शरबत जिहाद’ शब्द का प्रयोग किया, जिससे विवाद भड़क उठा।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक लोकप्रिय शरबत ब्रांड अपने मुनाफे का उपयोग मस्जिदों और मदरसों के निर्माण में कर रहा है।
हालांकि उन्होंने किसी ब्रांड का नाम नहीं लिया, लेकिन माना गया कि उनका इशारा ‘रूह अफ़ज़ा’ की ओर था।


🧪 ‘रूह अफ़ज़ा’ का इतिहास

  • ‘रूह अफ़ज़ा’ की शुरुआत 1906 में हकीम हाफ़िज़ अब्दुल मजीद ने की थी।
  • भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनके दो बेटे अलग हुए:
    • अब्दुल हमीद भारत में रहकर हमदर्द इंडिया का संचालन करने लगे।
    • मोहम्मद सईद पाकिस्तान चले गए और वहाँ हमदर्द पाकिस्तान की नींव रखी।
  • इसी कारण, आज ‘रूह अफ़ज़ा’ भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश — तीनों देशों में एक पहचान रखता है।

🛒 भारत-पाक संबंध और उत्पाद विवाद

  • वर्ष 2019 में भारत में रूह अफ़ज़ा की अचानक कमी आ गई थी।
  • इसी बीच, पाकिस्तान से उत्पाद मंगवाने की बात सामने आई, जिससे विवाद और गहराया।
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने अमेज़न को यह आदेश दिया था कि वह अपने प्लेटफॉर्म से पाकिस्तानी ‘रूह अफ़ज़ा’ को हटाए, क्योंकि यह बिना स्पष्ट जानकारी के बेचा जा रहा था।

🌐 सोशल मीडिया और जन प्रतिक्रिया

  • बाबा रामदेव की ‘शरबत जिहाद’ टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।
  • कुछ ने इसे धार्मिक ध्रुवीकरण का प्रयास बताया, जबकि कुछ ने इसे वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धा का तरीका माना।
  • कई यूजर्स ने यह भी उजागर किया कि पतंजलि के कई उत्पादों के पास भी हलाल सर्टिफिकेट है, जिससे इस बयान को दोहरे मापदंड वाला करार दिया गया।

📌 निष्कर्ष

रूह अफ़ज़ा‘ सिर्फ एक शरबत नहीं, बल्कि भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
ऐसे ऐतिहासिक ब्रांडों को लेकर विवादों में बयानबाज़ी करने से पहले तथ्यात्मक जानकारी और ऐतिहासिक संदर्भ का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।
वर्तमान विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि वाणिज्य, संस्कृति और राजनीति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।


Curated by Gurdeep Singh, Senior Editor http://www.boldvoices.in

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