गौरव बम में हाइब्रिड नेविगेशन सिस्टम — विस्तृत रिपोर्ट

परिचय

‘गौरव’ एक लॉन्ग-रेंज गाइडेड बम (LRGB) है जिसे भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है। यह बम उच्च-सटीकता से लक्ष्य को नष्ट करने की क्षमता रखता है, और इसका प्रमुख आकर्षण इसका हाइब्रिड नेविगेशन सिस्टम है, जो इसे पारंपरिक बमों से कहीं अधिक स्मार्ट बनाता है।


हाइब्रिड नेविगेशन सिस्टम क्या है?

हाइब्रिड नेविगेशन सिस्टम का अर्थ है कि इसमें दो या अधिक नेविगेशन तकनीकों का संयोजन होता है ताकि बम को बेहतर मार्गदर्शन और सटीक लक्ष्य पर हमला करने में मदद मिल सके। गौरव बम में निम्नलिखित नेविगेशन सिस्टम का उपयोग किया जाता है:

1. इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS)

  • यह सिस्टम बम की गति, दिशा और स्थिति को मापता है।
  • इसमें जिरोस्कोप और एक्सेलेरोमीटर लगे होते हैं।
  • यह प्रणाली GPS के बिना भी कार्य कर सकती है, लेकिन समय के साथ त्रुटियाँ बढ़ सकती हैं।

2. ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS)

  • इसमें GPS, NavIC (भारतीय), GLONASS (रूसी) जैसे सैटेलाइट सिस्टम की सहायता से बम को रीयल टाइम लोकेशन मिलती है।
  • यह INS को सुधारता है और लक्ष्य पर सटीकता बढ़ाता है।

हाइब्रिड प्रणाली का लाभ:

  • INS + GNSS के संयोजन से बम को कम्युनिकेशन जामिंग, GPS डिनायल या दुर्भाग्यपूर्ण मौसम में भी दिशा बरकरार रखने में मदद मिलती है।
  • सटीकता: टारगेट पर हिट करने की क्षमता 10 मीटर से भी कम त्रुटि में होती है।
  • लॉन्ग रेंज: ‘गौरव’ बम 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य को भेद सकता है।

गौरव बम की अन्य विशेषताएँ:

विशेषताविवरण
वर्गलॉन्ग-रेंज गाइडेड बम
रेंज100+ किलोमीटर
वजन~500 किलोग्राम
माउंटिंग प्लेटफॉर्मलड़ाकू विमान (जैसे सुखोई-30 MKI, मिराज 2000)
मार्गदर्शन प्रणालीहाइब्रिड (INS + GNSS)
विनाश क्षमताहाई एक्सप्लोसिव वारहेड

सैन्य दृष्टिकोण से महत्व:

  • सर्जिकल स्ट्राइक क्षमता: दुश्मन की सीमा में बिना प्रवेश किए टारगेट को तबाह करने की ताकत।
  • कम जोखिम, उच्च प्रभाव: पायलट और विमान को खतरे में डाले बिना दुश्मन के भीतर गहराई तक हमला संभव।
  • स्वदेशी तकनीक: आत्मनिर्भर भारत के तहत भारत की मिसाइल/बम तकनीकों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा।

हालिया परीक्षण और सफलता

8 से 10 अप्रैल 2025 के बीच, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ‘गौरव’ लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम (LRGB) का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण में भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई विमान से बम को लॉन्च किया गया, जिसने लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लक्ष्य को उच्च सटीकता के साथ भेदा।

हाइब्रिड नेविगेशन सिस्टम की विशेषताएँ

‘गौरव’ बम में हाइब्रिड नेविगेशन सिस्टम का प्रयोग किया गया है, जो दो प्रमुख तकनीकों का संयोजन है:

  1. इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS):
    यह सिस्टम बम की गति, दिशा और स्थिति का आकलन करता है। इसमें जिरोस्कोप और एक्सेलेरोमीटर लगे होते हैं।
  2. ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS):
    इसमें GPS, NavIC जैसे सैटेलाइट आधारित पोजिशनिंग सिस्टम से डेटा प्राप्त कर INS की सटीकता बढ़ाई जाती है।

इस हाइब्रिड तकनीक की मदद से बम बिना सैटेलाइट सिग्नल के भी मार्गदर्शन बनाए रख सकता है और बाधित वातावरण में भी सटीकता बनाए रखता है।

तकनीकी विवरण

  • वजन: 1,000 किलोग्राम
  • रेंज: 100 किलोमीटर से अधिक
  • लॉन्च प्लेटफॉर्म: सुखोई-30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमान
  • निर्माण: स्वदेशी रूप से DRDO के रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद द्वारा
  • उद्योग सहयोग: अडानी डिफेंस और भारत फोर्ज जैसी कंपनियों का सहयोग

रणनीतिक महत्व

  • भारत की रणनीतिक क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि
  • सीमापार लक्ष्यों को बिना सीमा लांघे सटीक तरीके से नष्ट करने की ताकत
  • पायलटों की सुरक्षा के साथ मिशन की प्रभावशीलता में इजाफा
  • ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूती

निष्कर्ष:

गौरव’ बम में हाइब्रिड नेविगेशन सिस्टम इसका सबसे प्रमुख तकनीकी पहलू है, जो इसे सटीक, स्मार्ट, और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हथियार बनाता है। यह भारत की स्मार्ट वेपनरी क्षमताओं में एक क्रांतिकारी कदम है और भविष्य के युद्ध परिदृश्य में अहम भूमिका निभाएगा।


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