नई दिल्ली:
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में News18 के ‘Rising Bharat Summit 2025’ के दौरान एक दिलचस्प और भावुक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके बचपन में उन्हें ‘पूनम’ कहा जाता था। इसका कारण था—उनका जन्म ‘शरद पूर्णिमा’ के दिन हुआ था।


🍼 बचपन का नाम क्यों रखा गया ‘पूनम’?

अमित शाह ने बताया कि:

“मेरा जन्म शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था, और गांवों में अक्सर बच्चों को जन्म की परिस्थिति या दिन के अनुसार एक अस्थायी नाम दे दिया जाता है। मुझे ‘पूनम’ कहा जाने लगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि:

“मेरी बुआ ने तय किया था कि मेरा औपचारिक नाम तब रखा जाएगा जब मैं पांच साल का हो जाऊंगा। तब तक मुझे सभी ‘पूनम’ कहकर बुलाते थे।”


🏡 गांवों की पारंपरिक परंपरा

गांवों में यह एक आम परंपरा है कि बच्चे को जन्म के आधार पर एक प्रचलित या अस्थायी नाम दे दिया जाता है, जब तक कि उसका औपचारिक नामकरण नहीं हो जाता। यह नाम अक्सर किसी त्यौहार, तिथि या विशेष घटना से जुड़ा होता है।


👪 व्यक्तिगत और आत्मीय क्षण

इस मजेदार और आत्मीय खुलासे ने मंच पर मौजूद दर्शकों को मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया। अमित शाह के इस किस्से से यह भी जाहिर होता है कि एक वरिष्ठ राजनेता भी कितनी आत्मीयता से अपने बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि को याद करते हैं।


📌 निष्कर्ष

अमित शाह का यह किस्सा सिर्फ एक नाम की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय सामाजिक और पारिवारिक परंपराओं की गहराई को दर्शाता है। यह दिखाता है कि कैसे जीवन की शुरुआत से ही हमारे नाम, रिश्ते और पहचान संस्कृति से गहराई से जुड़े होते हैं।


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