एंटीलिया और वक्फ ज़मीन का विवाद: ओवैसी का दावा और हकीकत

पृष्ठभूमि:
मुंबई के अल्टामाउंट रोड पर स्थित एंटीलिया, दुनिया के सबसे महंगे निजी आवासों में से एक है, जिसकी कीमत लगभग ₹15,000 करोड़ आंकी गई है। यह 27 मंज़िला इमारत मुकेश अंबानी और उनके परिवार का निवास है। हाल ही में AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि यह इमारत वक्फ की ज़मीन पर बनी है, और यह मुद्दा अभी भी अदालत में विचाराधीन है।


जमीन का इतिहास:

एंटीलिया जिस ज़मीन पर बना है, वह पहले “करीमभॉय एब्राहिम खोजा यतीमखाना” नामक एक यतीमखाना (अनाथालय) की संपत्ति थी, जिसकी स्थापना 1895 में करीमभॉय एब्राहिम नामक व्यापारी और समाजसेवी ने की थी। यह संस्था वक्फ संपत्ति के अंतर्गत आती थी और इसका उद्देश्य खोजना समुदाय के अनाथ बच्चों की देखभाल करना था।

वर्ष 2002 में, इस ट्रस्ट ने आर्थिक कारणों से इस ज़मीन को बेचने के लिए अनुमति मांगी, जिसे मुंबई के चैरिटी कमिश्नर ने ₹21.5 करोड़ में बेचने की इजाज़त दी। यह ज़मीन एंटीलिया कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को बेची गई, जो मुकेश अंबानी के नियंत्रण में थी।


कानूनी विवाद और आपत्तियाँ:

इस बिक्री पर तत्काल विवाद शुरू हो गया क्योंकि वक्फ अधिनियम की धारा 51 के अनुसार, वक्फ संपत्ति को बेचने से पहले वक्फ बोर्ड से मंज़ूरी लेना अनिवार्य होता है। उस समय यह मंज़ूरी प्राप्त नहीं की गई थी। वक्फ बोर्ड ने इस बिक्री पर आपत्ति जताई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से इसे बॉम्बे हाईकोर्ट में भेज दिया गया।

हालांकि बाद में वक्फ बोर्ड ने अपनी आपत्ति वापस ले ली, जब एंटीलिया कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड ने ₹16 लाख का भुगतान कर एक ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) प्राप्त कर लिया।


ओवैसी का ताज़ा दावा:

2024 के अंत में और 2025 की शुरुआत में, ओवैसी ने फिर से इस मामले को उठाया और दावा किया कि एंटीलिया अभी भी वक्फ ज़मीन पर बना हुआ है और कानूनी रूप से यह मामला समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस ज़मीन की बिक्री में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुईं और यह समाज के ग़रीब मुस्लिम बच्चों के अधिकारों का हनन है।


वक्फ क़ानून में हालिया बदलाव:

2025 में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए वक्फ (संशोधन) विधेयक और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक ने इस विषय को और अधिक गरम कर दिया है। इन विधेयकों के तहत वक्फ संपत्तियों की निगरानी और नियंत्रण में बदलाव किए गए हैं, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि बड़ी संपत्तियों पर कब्ज़ा लेने या बचाने के प्रयास तेज़ हो सकते हैं।


वर्तमान स्थिति:

इस समय यह मामला अदालत में विचाराधीन है। यदि भविष्य में अदालत यह फैसला सुनाती है कि यह ज़मीन वास्तव में वक्फ संपत्ति है और गलत तरीके से बेची गई थी, तो यह भारत के सबसे अमीर परिवार पर कानूनी और नैतिक असर डाल सकता है। वहीं अगर अदालत यह माने कि कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी की गई थीं, तो मामला बंद हो सकता है।


निष्कर्ष:

एंटीलिया की ज़मीन को लेकर यह विवाद सिर्फ एक संपत्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक बन गया है कि कैसे वक्फ संपत्तियों की देखभाल, बिक्री और उपयोग पर सवाल उठते हैं। ओवैसी के दावे ने एक बार फिर इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है, और अब सबकी नजरें न्यायपालिका के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।


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