अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता: ओमान में शनिवार को अहम बैठक, ईरान ने कहा – “गेंद अमेरिका के पाले में”
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक नई कूटनीतिक पहल की शुरुआत हो रही है। ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने घोषणा की है कि दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शनिवार को ओमान में अप्रत्यक्ष उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे। यह वार्ता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों में संभावित सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
ईरान की प्रतिक्रिया: “यह अवसर भी है, परीक्षा भी”
ईरान के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह बैठक एक “अवसर” होने के साथ-साथ एक “परीक्षा” भी है। उन्होंने यह भी कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान इस वार्ता को लेकर तैयार है लेकिन अंतिम निर्णय अमेरिका पर निर्भर करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की तरफ से भी परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने को लेकर रुचि दिखाई गई है।
अमेरिका की सख्त चेतावनी: “ईरान के लिए बुरा दिन हो सकता है”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मुलाकात के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि यदि यह वार्ता असफल होती है, तो ईरान के लिए “बहुत बुरा दिन” आ सकता है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं रखने दिए जाएंगे। यह एक स्पष्ट संदेश है कि अमेरिका वार्ता में विफलता को सहन नहीं करेगा और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
इजरायल की ‘लीबिया मॉडल’ की मांग
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए ‘लीबिया मॉडल’ अपनाने की वकालत की है। इस मॉडल के अनुसार, ईरान को अपने सभी परमाणु हथियारों और कार्यक्रमों को पूरी तरह खत्म करके उन्हें देश से बाहर भेजना होगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का परमाणु ढांचा वर्षों से विकसित है और यह पूरे देश में फैला हुआ है, जिसे पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं होगा।
निष्कर्ष: क्या यह वार्ता ला पाएगी स्थिरता?
ओमान में प्रस्तावित यह वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की एक बड़ी कोशिश है। दोनों देशों के लिए यह एक कूटनीतिक मोड़ साबित हो सकता है, लेकिन इसमें कई चुनौतियाँ भी हैं — जैसे इजरायल की सख्त नीति, अमेरिका की आक्रामक चेतावनी, और ईरान की आंतरिक राजनीतिक इच्छाशक्ति। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह पहल स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ती है या फिर यह भी एक असफल प्रयास बनकर रह जाती है।

Curated by Gurdeep Singh : Source : https://news.google.com/











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