1. अमेरिका की धमकी और टैरिफ की पृष्ठभूमि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। उनका कहना है कि अगर चीन ने अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए गए 34% आयात शुल्क को नहीं हटाया, तो अमेरिका चीनी उत्पादों पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लागू करेगा। यह चेतावनी 9 अप्रैल से लागू हो सकती है। पहले से ही अमेरिका ने 20% टैरिफ लगाया हुआ था, जिसे अब तक बढ़ाकर 34% किया गया है। यदि यह नया टैरिफ लागू होता है, तो कुल टैरिफ दर 104% तक पहुंच जाएगी। यह कदम अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने और चीन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
2. चीन की सख्त प्रतिक्रिया: “आखिरी दम तक लड़ेंगे”
ट्रंप के बयान के बाद चीन ने तीव्र प्रतिक्रिया दी है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इसे ‘एकतरफा दबाव’ और ‘ब्लैकमेल’ करार दिया है। मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका का यह व्यवहार न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ है, बल्कि वैश्विक व्यापार को भी नुकसान पहुंचाएगा। चीन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने आर्थिक हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा और “आखिरी दम तक लड़ेगा।” चीन ने संकेत दिया है कि वह भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी उत्पादों पर भारी टैरिफ लगा सकता है या अन्य गैर-टैरिफ उपाय अपना सकता है।
3. वैश्विक बाजारों पर असर: निवेशकों में चिंता
अमेरिका और चीन के बीच इस व्यापार युद्ध का असर दुनिया भर के बाजारों पर देखने को मिल रहा है। न्यूयॉर्क, टोक्यो, शंघाई और लंदन जैसे प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों को डर है कि यह संघर्ष अगर और गहरा होता है, तो वैश्विक आर्थिक मंदी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। डॉलर में मजबूती, सोने की कीमतों में उछाल और तेल बाजारों में अस्थिरता जैसे संकेत साफ बता रहे हैं कि बाजार इस अनिश्चितता से भयभीत हैं।
4. विशेषज्ञों की चेतावनी: टैरिफ का बोझ आम जनता पर
अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों का कहना है कि इन टैरिफों का असली असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। चीनी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से अमेरिका में महंगाई का स्तर ऊपर जा सकता है। इसके अलावा, व्यापार युद्ध से कंपनियों के आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आ सकती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी। दूसरी ओर, चीन अपने उत्पादन को यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे अन्य बाज़ारों में स्थानांतरित कर सकता है, जिससे अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धा घट सकती है।
5. राजनीतिक असर और रणनीतिक पुनर्संतुलन
यह व्यापार युद्ध केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा बनता जा रहा है। अमेरिका, अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना चाहता है, जबकि चीन वैश्विक व्यापार में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहता है। इससे दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी बढ़ रही है और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे बहुपक्षीय मंचों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
निष्कर्ष: व्यापार युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरा
अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक अस्थिर मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर यह दोनों देशों की आर्थिक रणनीति को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर इसका प्रभाव अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष विश्व व्यापार व्यवस्था को गहरे संकट में डाल सकता है।

Curated by Gurdeep Singh : Source : https://news.google.com/











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