इज़राइल ने ग़ाज़ा पट्टी के आधे से अधिक हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह मुख्य रूप से बफ़र ज़ोन (सुरक्षा क्षेत्र) बनाने और उन्हें विस्तारित करने के माध्यम से किया गया है। इस प्रक्रिया में फिलिस्तीनी घरों, खेतों और ढांचे को बड़े पैमाने पर नष्ट कर दिया गया है।
बफ़र ज़ोन की स्थापना
इज़राइली सेना ने ग़ाज़ा में 3 किलोमीटर गहरा बफ़र ज़ोन और ‘नेटज़ारिम कॉरिडोर’ स्थापित किया है, जिससे ग़ाज़ा के उत्तर और दक्षिण को एक-दूसरे से अलग कर दिया गया है। प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि इन क्षेत्रों में लंबे समय तक सुरक्षा नियंत्रण बनाए रखने की योजना है। इसके साथ ही, उन्होंने फिलिस्तीनियों के बाहर पलायन को भी प्रोत्साहित किया है।
फिलिस्तीनी समुदायों पर प्रभाव
इन बफ़र ज़ोन्स के कारण बड़े क्षेत्र रहने योग्य नहीं रह गए हैं। हजारों घर, फैक्ट्रियाँ और खेत बर्बाद हो चुके हैं। इज़राइली सैनिकों ने बताया कि यह कार्यवाही हमास को छिपने की जगह न देने के उद्देश्य से की जा रही है, हालाँकि कुछ इसे 2023 के अक्टूबर में हमास के हमले के बदले के रूप में भी देख रहे हैं।
मानवाधिकार संबंधी चिंताएँ
मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इन बफ़र ज़ोन्स का विस्तार “जातीय सफ़ाया” और संभावित युद्ध अपराधों की श्रेणी में आ सकता है। इज़राइली सेना का दावा है कि उनके कार्य अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें मानवीय अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
बफ़र ज़ोन्स का भविष्य अनिश्चित
इन ज़ोन्स का भविष्य अभी स्पष्ट नहीं है। इज़राइल ने संकेत दिया है कि वह तब तक नियंत्रण बनाए रखेगा जब तक हमास को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाता और सभी बंधकों को रिहा नहीं किया जाता। आलोचकों का कहना है कि यह लंबे समय तक चलने वाला क़ब्ज़ा बन सकता है, जिससे आम नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

Curated by Gurdeep Singh : Source : https://news.google.com/











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