Curated by Gurdeep Singh, New Delhi
बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की मुलाकात – भारत पर अदृश्य दबाव?
बैंकॉक में आयोजित बिम्सटेक (BIMSTEC) सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस की बैठक सुर्खियों में रही। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम मानी जा रही है।
पृष्ठभूमि: बांग्लादेश में अशांति और भारत की भूमिका
अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शनों के चलते प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा और वे भारत में शरण लेने के लिए मजबूर हुईं। इस घटनाक्रम के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में काफी खटास आ गई थी। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच संवाद लगभग ठप था।
बैठक की तैयारी और शुरुआती संकेत
सम्मेलन से पहले जब भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पूछा गया कि क्या मोदी और यूनुस की मुलाकात होगी, तो उन्होंने कहा कि “फिलहाल कोई अपडेट नहीं है।” विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज में भी इस बैठक का कोई उल्लेख नहीं था। इससे ऐसा लगा कि कोई औपचारिक बातचीत नहीं होगी।
मुलाकात और मुख्य चर्चा
3 अप्रैल को बिम्सटेक के सामूहिक फोटो सेशन में दोनों नेता एक साथ खड़े हुए, लेकिन दोनों की मुद्रा गंभीर थी। हालांकि 4 अप्रैल को दोपहर में दोनों नेताओं की बैठक की तस्वीरें सामने आईं। लगभग 30 मिनट चली इस बैठक में सीमा सुरक्षा, धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति और आपसी रिश्तों पर चर्चा हुई।
क्या अमेरिका की भूमिका थी?
सूत्रों के अनुसार इस बैठक के पीछे अमेरिका की भी एक भूमिका मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी खुफिया एजेंसियां और सैन्य प्रतिष्ठान म्यांमार और रखाइन क्षेत्र में अपनी रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए बांग्लादेश की भूमिका को अहम मानते हैं। माना जा रहा है कि भारत पर इस बैठक के लिए अमेरिका की ओर से “नरम दबाव” डाला गया।
बैठक के संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बैठक के दौरान बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि वहां किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति से बचा जाना चाहिए। वहीं, मोहम्मद यूनुस ने भी संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की इच्छा जताई।
बांग्लादेश की प्रतिक्रिया
बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी (BNP) ने इस बैठक का स्वागत किया और कहा कि यह बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। पार्टी ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के संबंधों में अब सुधार देखने को मिलेगा।
निष्कर्ष
यह बैठक भारत और बांग्लादेश के बीच तनावपूर्ण संबंधों को नरम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। चाहे इसके पीछे कूटनीतिक दबाव रहा हो या द्विपक्षीय जरूरतें, यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के लिए सहयोग और स्थिरता भविष्य की आवश्यकता है।












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