Curated by Gurdeep Singh
🇺🇸 अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध: चीन के लिए नेतृत्व का मौका, भारत बन सकता है बड़ा भागीदार
🔍 पृष्ठभूमि
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति रहते हुए ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को अपनाते हुए चीन समेत कई देशों पर आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ा दिए। उनका उद्देश्य था कि अमेरिकी बाजार को सस्ता विदेशी सामान से बचाया जाए और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिले।
लेकिन इसके गंभीर अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हुए — व्यापार युद्ध शुरू हो गया, वैश्विक आपूर्ति शृंखला में बाधा आई और चीन को खुद को एक ‘स्थिर ताकत’ के रूप में पेश करने का मौका मिल गया।
🌍 चीन के सामने एक रणनीतिक मौका
✅ वैश्विक छवि सुधारने का अवसर
- कोविड-19 के दौरान चीन की छवि काफी खराब हुई थी — इसे महामारी के प्रसार के लिए जिम्मेदार माना गया था।
- लेकिन ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति और अमेरिका की वैश्विक भूमिका में कमी ने चीन को एक “स्थिर और जिम्मेदार” देश की भूमिका में आने का अवसर दिया।
- चीन अब खुद को “व्यवस्था को चलाने वाला” देश कह रहा है, न कि उसे बिगाड़ने वाला।
✅ कूटनीतिक सक्रियता
- चीन ने अमेरिका की नीतियों का जवाब संतुलन के साथ दिया — जवाबी टैरिफ लगाए लेकिन पूरी तरह से टकराव से बचा।
- उसने दुर्लभ खनिज पदार्थों के निर्यात में कटौती, अमेरिकी कंपनियों की जांच, और कुछ अमेरिकी खाद्य उत्पादों के आयात पर रोक जैसे कदम उठाए।
✅ दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति
- चीन अपने आर्थिक मॉडल को आंतरिक खपत आधारित विकास की ओर मोड़ रहा है, ताकि बाहरी दबाव का असर कम हो।
- वह धीरे-धीरे अपनी मुद्रा (युआन) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कर रहा है और डिजिटल युआन जैसी पहल कर रहा है।
🇮🇳 भारत की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
🌐 इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की स्थिति
- भारत एक लोकतांत्रिक, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है जिसकी वैश्विक साख अच्छी है।
- यदि चीन खुद को एक वैश्विक नेता बनाना चाहता है, तो उसे भारत को साथ लेकर चलना होगा — क्योंकि भारत पश्चिमी देशों के लिए भी भरोसेमंद भागीदार है।
⚔️ प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों
- भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है, लेकिन आर्थिक स्तर पर दोनों के पास सहयोग की बड़ी संभावनाएं भी हैं।
- भारत का ग्लोबल सॉफ्ट पावर, डिजिटल ताकत और युवाशक्ति उसे एक अहम रणनीतिक खिलाड़ी बनाते हैं।
📉 अमेरिका में मंदी की संभावना
🚨 आर्थिक संकेतक:
- अमेरिका के कई प्रमुख बैंक (जैसे जेपी मॉर्गन, सिटीग्रुप) ने मंदी की आशंका जताई है।
- स्टॉक मार्केट में गिरावट, बॉन्ड यील्ड में गिरावट और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी से बदलाव दिखा रहे हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अनिश्चित दौर में है।
🎯 ट्रंप नीति का असर
- टैरिफ बढ़ाने के कारण अमेरिकी उत्पादों की लागत बढ़ी, आयात महंगा हुआ और घरेलू महंगाई भी बढ़ी।
- इससे ना केवल व्यापार घाटा बढ़ा बल्कि कई अमेरिकी कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता भी प्रभावित हुई।
🇨🇳 चीन की अर्थव्यवस्था – चुनौतियों के बावजूद स्थायित्व
📊 आंतरिक संकट
- चीन को रियल एस्टेट संकट, घटती जनसंख्या, और निर्यात पर निर्भरता जैसी समस्याएं हैं।
- फिर भी, चीन की सरकारी योजनाएं और नियंत्रित अर्थव्यवस्था उसे संकटों से उबारने की क्षमता रखती है।
🌐 अंतरराष्ट्रीय पहुंच
- चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) जैसी योजनाओं के माध्यम से एशिया, अफ्रीका और यूरोप में अपना प्रभाव फैलाया है।
- वह दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि अमेरिका के विपरीत वह दीर्घकालिक साझेदार और निवेशक है।
🔚 निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति भले ही अमेरिका को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लाई गई हो, लेकिन इसने चीन को खुद को एक वैकल्पिक वैश्विक नेता के रूप में प्रस्तुत करने का मौका दिया है। और इस पूरी परिस्थिति में, भारत जैसे देशों की भूमिका निर्णायक हो सकती है — चाहे वो कूटनीति हो, व्यापार, या वैश्विक स्थिरता।













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