ट्रंप ने नए टैरिफ के ऐलान में पड़ोसी देशों मैक्सिको और कनाडा पर कोई नया टैरिफ नहीं लगाया है। हालांकि, फरवरी में ही वहां से आने वाले सामानों पर 25 फीसदी टैक्स लगाया जा चुका है। बावजूद इसके जीडीपी नुकसान के मामले में सबसे ज्यादा असर नैक्सिको पर पड़ता दिख रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक मैक्सिको की जीडीपी में दो फीसदी की गिरावट आ सकती है औऱ उसे करीब 36.4 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ की घोषणा करते हुए लगभग सभी देशों से आयातित वस्तुओं पर 10% शुल्क लगाने का ऐलान किया है। इसके अतिरिक्त, कुछ देशों पर इससे भी अधिक शुल्क निर्धारित किया गया है। ट्रंप प्रशासन ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 26% टैरिफ लगाया है, जो यूरोपीय संघ के 20%, जापान के 24% और दक्षिण कोरिया के 25% टैरिफ से अधिक है। चीन से आयातित वस्तुओं पर यह शुल्क 34% तक बढ़ा दिया गया है, जिससे चीनी सामानों पर कुल टैरिफ 54% हो गया है।
भारत की जीडीपी पर प्रभाव
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत पर लगाए गए 26% टैरिफ से देश की जीडीपी पर मामूली असर पड़ने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि भारत कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करता है, तो इसकी अर्थव्यवस्था पर मात्र 0.01% का प्रभाव पड़ सकता है। भारतीय अर्थशास्त्रियों और रेटिंग एजेंसियों के अनुसार, जीडीपी में 0.05% से 0.10% तक की गिरावट हो सकती है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टैरिफ का दायरा बढ़ता है, तो यह प्रभाव 0.20% तक हो सकता है।
अन्य देशों पर प्रभाव
मैक्सिको की जीडीपी में 2% की गिरावट का अनुमान है, जिससे उसे लगभग 36.4 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। कनाडा की जीडीपी में 1.05% की गिरावट और 24.5 अरब डॉलर के घाटे की संभावना है। इसके अलावा, वियतनाम की जीडीपी में 0.99%, थाईलैंड में 0.93%, ताइवान में 0.68%, स्विटजरलैंड में 0.59%, दक्षिण कोरिया में 0.58%, चीन में 0.48%, जापान में 0.19% और इंडोनेशिया में 0.20% की गिरावट का अनुमान है। अमेरिकी जीडीपी को भी 0.49% के नुकसान की संभावना है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता
इन टैरिफों के मद्देनजर, भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका के दौरे पर हैं, जहां वे इन मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। भारत ने कुछ उत्पादों पर टैरिफ कम करने की पेशकश की है और अमेरिकी रक्षा उपकरणों और ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, ताकि व्यापार संतुलन स्थापित किया जा सके।
निष्कर्ष
अमेरिका द्वारा लगाए गए इन टैरिफों से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ने की संभावना है। भारत पर इसका सीमित प्रभाव होने का अनुमान है, लेकिन यह आवश्यक है कि भारत अपनी व्यापार नीतियों की समीक्षा करे और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।












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