अमित शाह ने नीतीश कुमार और चिराग पासवान को वक्फ बिल पर कैसे भरोसे में लिया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ (संशोधन) विधेयक पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [एलजेपी-आर] के समर्थन को सुनिश्चित करने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से मुलाकात की। पहले इन दलों में विधेयक को लेकर संदेह था, लेकिन शाह की पहल के बाद उन्होंने समर्थन दिया।
विधेयक पर पहले की स्थिति
पिछले साल अगस्त में नरेंद्र मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक संसद में पेश किया था, जिस पर विपक्षी दलों के साथ-साथ एलजेपी-आर ने भी आपत्ति जताई थी। हालांकि, जेडीयू ने उस समय सदन में समर्थन दिया, लेकिन पार्टी के भीतर कुछ असंतोष था, खासकर मुस्लिम नेताओं के बीच। बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया, जिसने जेडीयू और एलजेपी-आर के सुझाए गए 14 संशोधनों को स्वीकार किया, जबकि विपक्षी दलों के 44 संशोधनों को खारिज कर दिया।

बिहार में मुस्लिम संगठनों का विरोध
बिहार में मुस्लिम संगठनों ने विधेयक के विरोध में प्रदर्शन किया और नीतीश कुमार और चिराग पासवान को भी इन प्रदर्शनों में शामिल होने का निमंत्रण दिया। मुस्लिम संगठनों ने जेडीयू और एलजेपी-आर की इफ्तार पार्टियों का बहिष्कार करने की घोषणा भी की, जिससे नीतीश कुमार के लिए अपने मुस्लिम समर्थन आधार को बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई।
नीतीश कुमार और जेडीयू का समर्थन
2 अप्रैल को लोकसभा में विधेयक पेश होने से पहले, जेडीयू के अध्यक्ष ललन सिंह और कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने अमित शाह से मुलाकात की। बैठक में शाह ने जेडीयू के सभी संदेहों को दूर किया, जिसके परिणामस्वरूप पार्टी ने विधेयक पर समर्थन देने का निर्णय लिया और व्हिप जारी किया।
30 मार्च को पटना में अमित शाह ने एनडीए नेताओं के साथ बैठक की, जिसमें नीतीश कुमार भी शामिल थे। शाह ने नीतीश कुमार को समझाया कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता लाने के लिए है और इसका उद्देश्य धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करना नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पसमांदा और गरीब मुसलमानों के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं का एनडीए के प्रति समर्थन बढ़ेगा।
चिराग पासवान का रुख और समर्थन
चिराग पासवान, जो विभिन्न मुद्दों पर अलग रुख अपनाते रहे हैं, ने भी विधेयक पर समर्थन देने में संकोच दिखाया था। हालांकि, अमित शाह ने उनसे मुलाकात कर उनके संदेह दूर किए और आगामी चुनावों में उचित सीट साझेदारी का आश्वासन दिया, जिसके बाद एलजेपी-आर ने भी विधेयक का समर्थन किया।











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