प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ। वे भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनकी पत्नी कमला नेहरू की इकलौती संतान थीं। उनके दादा, मोती लाल नेहरू, एक प्रमुख वकील और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने अपने पोते से भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने का आग्रह किया।
इंदिरा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही ली। बाद में, उन्होंने 1934 में स्विट्ज़रलैंड के एक स्कूल में और फिर 1937 में इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन किया जहाँ उन्होंने इतिहास की पढ़ाई की। वहाँ रहते हुए, उन्होंने भारतीय राजनीतिक गतिविधियों में रुचि लेना शुरू किया।
स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी
इंदिरा गांधी का राजनीतिक जीवन 1930 के दशक में शुरू हुआ। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुईं और अपने पिता के साथ स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भागीदार रहीं। 1942 में, जब महात्मा गांधी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत की, इंदिरा गांधी ने भी इसमें भाग लिया और उन्हें गिरफ्तार किया गया।
राजनीतिक करियर की शुरुआत
1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, इंदिरा गांधी को अपनी माँ की बीमारी के कारण राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी पड़ी। 1959 में, उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह पद उन्हें न केवल राजनीति में एक स्थायी स्थान प्रदान करता है, बल्कि उनके नेतृत्व कौशल को भी दर्शाता है।


प्रधानमंत्री का कार्यकाल
पहली बार प्रधानमंत्री
1966 में, इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उनके पहले कार्यकाल में, उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की शुरुआत की:
- हरित क्रांति: इस कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि के उत्पादन में वृद्धि करना था। उन्होंने नई कृषि तकनीकों और उन्नत बीजों का उपयोग कर किसानों को प्रोत्साहित किया।
- आर्थिक सुधार: इंदिरा गांधी ने औद्योगीकरण को बढ़ावा दिया और सार्वजनिक क्षेत्र में कई कंपनियों की स्थापना की।
- सामाजिक नीतियाँ: उन्होंने महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए कई योजनाएँ लागू कीं, जैसे कि मातृत्व लाभ योजनाएँ और विद्यालयों में प्रवेश हेतु कार्यक्रम।
आपातकाल (1975-1977)
इंदिरा गांधी का प्रधानमंत्री कार्यकाल विवादों से भरा रहा। 1975 में, उन्होंने देश में आपातकाल घोषित किया। इसके पीछे कई कारण थे, जैसे भारत के राजनीतिक और आर्थिक संकट। आपातकाल के दौरान, नागरिक स्वतंत्रताएँ सीमित कर दी गईं और कई विपक्षी नेता जेल में डाल दिए गए। यह समय उनके राजनीतिक करियर का सबसे विवादास्पद हिस्सा था।
1980 में पुनः प्रधानमंत्री
1977 में कांग्रेस पार्टी को चुनावी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 1980 के चुनावों में उनकी वापसी हुई। इस बार, उन्होंने सशक्त नीतियाँ लागू कीं, जिनमें बांग्लादेश के नागरिकों के साथ मानवता की दृष्टि से सहानुभूति शामिल थी।
महत्वपूर्ण निर्णय और नीतियाँ
- बैंक राष्ट्रीयकरण: 1969 में, उन्होंने भारत के 14 प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। इससे आम जनता को बैंकिंग सेवाओं का बेहतर लाभ मिला।
- भारत-पाक युद्ध 1971: इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए मजबूती से समर्थन किया और भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध जीतकर बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलाई।
- सिख दंगे: 1984 में, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, देश में बड़ी धार्मिक अशांति फैल गई। यह घटना उनके जीवन का दुखद अंत थी, लेकिन उनके नेता के रूप में उनकी छवि आज भी बनी हुई है।
इंदिरा गांधी की मृत्यु
इंदिरा गांधी, जो भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, की मृत्यु 31 अक्टूबर 1984 को हुई। उनकी हत्या एक दंगे के राज्य के दौरान हुई, जब उनके दो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें दिल्ली स्थित उनके आवास पर गोली मार दी। यह घटना उन्हें सिख आंदोलन के संदर्भ में एक प्रतिशोध के रूप में देखी गई, क्योंकि 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान स्वर्ण मंदिर पर हमला किया गया था, जिससे सिखों में गहरा असंतोष हुआ था।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, देश में व्यापक सिख दंगे भड़के, जिसमें हजारों निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई। उनकी मृत्यु ने भारतीय राजनीति और समाज में एक गहरा असर छोड़ा। उनके नेतृत्व की छवि को एक शक्तिशाली और विवादास्पद राजनीतिज्ञ के रूप में देखा गया, जिन्होंने देश में कई परिवर्तन लाए।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, उनके बेटे राजीव गांधी ने पार्टी की बागडोर संभाली और उन्हें प्रधानमंत्री बनाया गया। उनकी मृत्यु के कारण, भारत ने एक अज्ञात शोक में डूब गया, और उन्हें एक बड़ी नेता के रूप में याद किया जाता है, जिनकी अनूठी शैली और दूरदर्शिता ने देश की राजनीति को आकार दिया।
आज भी, इंदिरा गांधी को भारतीय राजनीति में “आयरन लेडी” के नाम से याद किया जाता है और उनके योगदान को श्रद्धांजलि दी जाती है।
विरासत
इंदिरा गांधी को आज भी भारत की “आयरन लेडी” के नाम से जाना जाता है। उनका जीवन और कार्य उनके समय के अनुकरणीय नेताओं का परिचायक हैं। उनकी राजनीतिक दृष्टि और नेतृत्व ने भारतीय राजनीति में स्थायी छाप छोड़ी है। उन्होंने भारत के संदर्भ में मामला उठाने के लिए एक महिला की शक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया।
इंदिरा गांधी न केवल भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, बल्कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व का एक प्रतीक बनकर उभरीं। उनके योगदान का मूल्यांकन आज भी होता है, और उनकी लोकतांत्रिक प्रवृत्तियों, संघर्षों और निर्णयों को अध्ययन तथा चर्चा का विषय बनाया गया है।
इस प्रकार, इंदिरा गांधी का जीवन और कार्य भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो हमें उनके समर्पण, साहस और दृढ़ता से प्रेरणा देता है।












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