तृतीय नवरात्र : माँ चंद्रघंटा

तृतीय नवरात्र : माँ चंद्रघंटा

नवरात्र का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा को समर्पित है। माँ चंद्रघंटा देवी दुर्गा का एक स्वरूप हैं। इनका नाम “चंद्रघंटा” इसीलिए पड़ा क्योंकि इनके मस्तक पर एक चाँद जैसा घंटा है।

माँ चंद्रघंटा की पूजा

माँ चंद्रघंटा की पूजा का महत्व अत्यधिक है। इस दिन भक्त जन विशेष रूप से मां की शोभायात्रा का आयोजन करते हैं और उनके चरणों में अर्पण करते हैं।

विशेषताएँ

  1. स्वरूप: माँ चंद्रघंटा के तीन आंखें और एक हाथ में त्रिशूल होता है।
  2. शक्ति: ये भक्तों को भय, तनाव और शत्रुओं से मुक्ति दिलाती हैं।
  3. भोजन: इस दिन विशिष्ट उपवास की परंपरा भी है, जिसमें फल और दूध का सेवन किया जाता है।

इस दिन की पूजा से भक्तों को मानसिक शांति और आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। माँ चंद्रघंटा सभी भक्तों के जीवन में संतुलन और आस्था का संचार करती हैं।

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